विचार मंथन

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Rinki Raut


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अन्नदाता की भूख

Posted On: 23 May, 2016  
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social issues में

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साँझ की शिकायत

Posted On: 20 Feb, 2016  
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कविता में

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आतंकवादी हमले पर असहिष्णुता देखना जरुरी है

Posted On: 5 Jan, 2016  
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social issues में

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औरत की जेब क्यूँ नहीं होती?

Posted On: 30 Dec, 2015  
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social issues में

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तू कौन है?

Posted On: 8 Dec, 2015  
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कविता में

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PK को टैक्स फ्री करना

Posted On: 5 Jan, 2015  
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होली के रंग

Posted On: 16 Mar, 2014  
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होली के रंग

Posted On: 16 Mar, 2014  
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के द्वारा: Rinki Raut Rinki Raut

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प्रिय रिंकी तुमने लेख के माध्यम से बहुत अच्छा प्रश्न उठाया है बेटी में एक संस्था से जुडी हूँ सूर्या संस्थान उसका निर्माण ७० वर्ष की आयु में आशा रानी वोहरा जी ने बहुत कम पूंजी से शुरू किया था उसमें विभिन्न भाषा के कवि और लेखक जुड़े हुए हैं उन सब की एक ही राय है हिंदी के पाठक वर्ग के पास पैसे का अभाव रहता है अखबार भी यदि नाई की दूकान पर मिल जाए सब उसको पढ़ लेते हैं | लेखक लिखने में अपनी जान लगा देते हैं अच्छा लिखते हैं दिल्ली में कई लायब्रेरी हैं जिनमें अनमोल किताबें हैं लेकिन खरीद कर कोई नहीं पढ़ना चाहता अंग्रेजी का पाठक धनाढ्य वर्ग से आता है दूसरा हमारे यहां यह धारणा है आपकी आलमारी में यदि अंग्रेजी के नामी राइटर की किताब है जिसे आपने कभी उठा क्र देखा नहीं आप पढ़े लिखे माने जाओगे आप भी यदि किसी के घर यदि ड्राइंगरूम में किताबें कांच से देखोगे आप भी पढ़े लिखे हमारे यहाँ भी कितने लोग ब्लॉग में किसी के लेख को पढ़ते हैं प्रतिक्रिया दूर की बात है |

के द्वारा: Shobha Shobha

के द्वारा: Rinki Raut Rinki Raut

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आदरणीय महोदया , अपना अनुभव शेयर कर रहा हूँ। २-३ दोस्त साथ रहते है, जिसमे दो दोस्त चाय के लिए होने वाले खर्च आपस में शेयर करते है जबकि तीसरा नहीं। जब पडोसी दोस्त शक़्क़र मांगने आता है और वह कहता है कि चाहे वह कोई दूसरी वस्तु ले जाये जो मेरी अपनी है, लेकिन शक़्क़र दे नहीं सकता क्योंकि इसमें मेरा कोई शेयर नही है। यह सिर्फ महिलाओं की मानसिकता नहीं है, यह एक विचार भी है। कमाने वाला जब पति है, तो पत्नी खर्च करने में संकोच करती है। कभी कभी तो सीमाएं तय हो जाती है कि किसी सीमा तक वह खर्च करने में वह अपने आप को स्वतंत्र समझती है। हर चीज़ अच्छी लगती है जब तक वे सीमाओं के भीतर होती है। विचार अभिव्यक्ति की भी सीमाएं आखिर है ही । बस मन को नियंत्रित करना जरूरी है। जेब यदि फ़टी हो तो किसी काम की नहीं है। शुभकामनाओं सहित।

के द्वारा: Prakash Mausam Prakash Mausam




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